यवतमाळ विषाक्तता: सिंजेंटा के कीटनाशक अधिकतम शामिल हैं

एमएपीपीपी, पब्लिक आयईसीसीएचआरपॅन इंडिया और पैन एपी से प्रेस विज्ञप्ति: 18.09.2020

अधिक लोग प्रभावित, स्वास्थ्य के लिए अधिक गंभीर नुकसान: भारत के यवतमाल जिले में सिंजेंटा के “पोलो” की विषाक्तता पहले से कहीं अधिक है। यह केवल पंजीकृत दस्तावेजों द्वारा इंगित किया गया है, फिर भी बासेल में स्थित कृषि-रासायनिक कंपनी अभी भी भारत में अत्यधिक विषाक्त उत्पाद बेचती है। नतीजतन, आज ५१ प्रभावित परिवार स्विस ओईसीडी नॅशनल कॉन्टॅक्ट पॉईंट पर एक विशेष उदाहरण स्थापित कर रहे हैं।

सर्दियों के मौसम २०१७ में, मध्य भारत के यवतमाल क्षेत्र में सैकड़ों कपास उत्पादकों को कीटनाशकों द्वारा गंभीर रूप से विषाक्तता हुई थी। पैन इंडिया और पब्लिक आई की रिपोर्ट ने संदर्भ और इसके निहितार्थ का दस्तावेजीकरण किया। सिंजेंटा ने स्पष्ट रूप से घटना के स्वास्थ्य और आर्थिक परिणामों के लिए किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी से इनकार किया, यह दावा करते हुए कि पोलो* जहर मामले में शामिल था ऐसा “कोई सबूत नहीं था”। दुनिया के सबसे बड़े कीटनाशक निर्माता ने भी आधिकारिक तौर पर स्विस नेशनल टीवी द्वारा निर्मित और प्रसारित यवतमाल वृत्तचित्र पर आपत्ति जताई।

हमारे सहयोगी संगठनों द्वारा प्राप्त आधिकारिक दस्तावेज अब इस त्रासदी और इसके चल रहे प्रभाव में पोलो द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को प्रदर्शित करते हैं। और दस्तावेजों के अनुसार, पुलिस ने सिंजेंटा के कीटकनशको से संबंधित विषाक्तता के ९६ मामले दर्ज किए, जिनमें से दो की मौत हो गई। तथ्यों और आगे के शोध के आधार पर, लोकल महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ पेस्टिसाइड पॉइज़न परसन्स (एमएपीपीपी) ने पेस्टिसाइड नेटवर्क इंडिया (पैन इंडिया) और एशिया पैसिफिक (पैन एपी), यूरोपीय संवैधानिक और मानवाधिकार (ईसीसीएचआर) और पब्लिक आय ने संयुक्त रूप से ५१ किसान परिवारों का दस्तावेजीकरण किया।

विषाक्तता से बचे लोंगो ने सूचना दी की उन्हमें पोलो छिड़काव के बाद गंभीर लक्षण दिखाई दिए । ५१ पीड़ितों में से ४४, जिनमें से अधिकांश अस्पताल में भर्ती थे, अस्थाई रूप से अंधे हो गए और १६ लोग कई दिनों तक बेहोश रहे। मतली, सांस लेने में कठिनाई से लेकर स्नायविक और मांसपेशियों की शिकायत तक के अन्य लक्षण हैं, जिनमें से कुछ लक्षण आज भी जारी हैं। नतीजतन, लोग अक्सर अस्थायी रूप से काम करने में असमर्थ थे, जिसके कारण उनकी पहले से ही कम आय में भारी कमी आई।

यह मामला मानवाधिकार उल्लंघन का एक गंभीर उदाहरण है। स्विस कंपनियां इसके लिए जिम्मेदार हो सकती हैं और कंपनियां अब जिम्मेदारी स्वीकार करे या नाही यह चुन सकती हैं । जिम्मेदार व्यावसायिक पहल संगठन अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निर्णायक कदम उठा रहे हैं। इस यथोचित परिश्रम के परिणाम से आखिरकार सिंजेंटा को अपने उत्पादों से जुड़े कई जोखिमों को गंभीरता से लेने और यह प्रत्याभूती देने के लिए मजबूर करती है कि और एक यवतमाल नहीं होगा।

एमएपीपीपी, पैन इंडिया और पैन एपी, ईसीसीएचआर और पब्लिक आई ने पीड़ितों के परिवारों की मदद के लिए बहुराष्ट्रीय उद्योगों पर ओईसीडी निर्दोशको के लिए नॅशनल कॉन्टॅक्ट पॉंईट (एनसीपी) पर एक विशिष्ट उदाहरण दाखिल किया है। सामूहिक रूप से, वे मांग कर रहे हैं कि सिंजेंटा भारत में छोटे पैमाने के किसानों को खतरनाक कीटनाशक बेचने से परहेज करे, जिन्हें पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) की आवश्यकता है और जिसके लिए – जैसे पोलो छिडकावं से – विषाक्तता का कोई इलाज नहीं है। इसके अलावा, कंपनी पीड़ितों के ५१ परिवारों को राहत प्रदान के लिए उपचार लागत और आय की हानि के लिए मुआवजा दे ।

लिस दस्तावेजों में पोलो के कारण दो मौतों का सबूत उपलब्ध हैं। बचे हुए लोगो के रिश्तेदारों और विषक्तता से तीसरे एक जीवित बचे व्यक्ती के साथ मिलकर बासेल में एक विशेषज्ञ कानून कंपनी ने उत्पाद दायित्व के आधार पर मुआवजे के लिए दावा किया है, क्योंकी कीटनाशक में से एक सक्रिय तत्व (डायफेन्थुरान) सीधे स्विट्जरलैंड से आया है। बासेल-स्टैड्ट (मध्यस्थता प्राधिकरण) के कॅन्टोन की दिवाणी अदालत में श्री सिल्वियो रीसेन, श्री थबोट मेयर, लॉफर्ड स्कडेनवेल्ट इन वकीलों द्वारा मुकदमा दर्ज किया गया है । यह कानूनी कदम ओईसीडी (एनसीपी) के विशिष्ट उदाहरण के समानांतर, लेकिन स्वतंत्र रूप से उठाया जा रहा है, जिसमें ये दो पक्ष शामिल नहीं हैं।

जिम्मेदार व्यावसायिक पहल संगठन यह सुनिश्चित करेगा कि किसी कंपनी की विदेशी सहायक कंपनियों द्वारा किए गए मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले में क्षति का दायित्व भी कंपनी मुख्यालय द्वारा वहन किया जाएगा। यदि स्विस मुख्यालय ने देखभाल करने के लिए पर्याप्त कर्तव्य किया होता, तो उल्लंघन को रोका जाता।  विशेष रूप से भारत में, यह पहली बार है जब कीटनाशक विषाक्तता के शिकार का स्तर इस चरण तक पहुँच चुका हैं।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
देवानंद पवार, संयोजक, एमएपीपीपी, +९१ ९४२३१३१९५९
डॉ. नरसिम्हा रेड्डी, पैन इंडिया, + ९१ ९०१०२०५७४२, nreddy.donthi20@gmail.com
ओलिवर क्लासेन, मीडिया निदेशक पब्लिक आय, +४१४४२७७७९०६, oliver.classen@publiceye.ch
एनाबेल बर्मन, ईसीसीएचआर मीडिया निदेशक, +४९३०६९८१९७९७, presse@ecchr.eu

*पोलो यह एक कीटनाशक है जिसमें ‘डायफेन्थुरान’ यह सक्रिय घटक है, जिसे २००९ में स्विट्जरलैंड के बाजार मे से हटा दिया गया था। इसे पीआयसी के तहत रसायनों की सूची में सूचीबद्ध किया गया है, जिसका अर्थ है सक्रिय संघटक जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्रतिबंधित है।यूरोपियन केमिकल्स एजेंसी (ECHA) डायफेन्थुरान को “श्वसन विषाक्त” के रूप में वर्गीकृत करती है और कहती है कि “यह लंबे समय तक या बार-बार संक्रमण से अंग को नुकसान पहुंचा सकता है।”

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